चक्रवात की आशंका के बीच खुर्दा जिला प्रशासन ने तेज की तैयारियां, ४३० आश्रयस्थल चिह्नित ;

आठ मोटर चालित नौकाएं तैनात; अगले १५ दिनों में प्रसव की संभावित तिथि वाली ५३९ गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी

दिलीप कुमार पटनायक

खुर्दा, २४ अक्टूबर :- बंगाल की खाड़ी में कम दबाव के क्षेत्र से संभावित चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने के संबंध में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान के बाद खुर्दा जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं। संभावित चक्रवाती खतरे को देखते हुए जिले की सभी आपातकालीन प्रतिक्रिया एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।


जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के अध्यक्ष अमृत ऋतुराज ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को आपसी समन्वय बनाए रखने तथा जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए सभी एहतियाती उपाय समय रहते सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बैठक में अतिरिक्त जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, प्रखंड विकास अधिकारी, तहसीलदार तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए। जिलाधिकारी ने चौबीसों घंटे सतर्कता, विभागों के बीच प्रभावी समन्वय तथा आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई पर विशेष जोर दिया।
जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (डीईओसी) और अधीनस्थ कार्यालयों के नियंत्रण कक्षों को २४ घंटे चालू रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान, राहत कार्यों का समन्वय तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

४३० आश्रयस्थल तैयार रखने की व्यवस्था

संभावित आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने कुल ४३० आश्रयस्थलों की पहचान की है। इनमें ५१ मौजूदा चक्रवात एवं बाढ़ आश्रयस्थल तथा ३७९ अतिरिक्त भवन शामिल हैं, जिनका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी आश्रयस्थलों के रूप में किया जा सकेगा। इन केंद्रों के संचालन और व्यवस्था की निगरानी के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा क्षेत्रीय अधिकारियों को शामिल करते हुए आश्रयस्थल प्रबंधन समितियों का गठन किया गया है।
प्रशासन इन केंद्रों में पेयजल, स्वच्छता, बिजली तथा वैकल्पिक विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
निचले और बाढ़ संभावित क्षेत्रों की पहचान कर ली गई है। अधिकारियों को आवश्यकता पड़ने पर वहां के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। विशेष राहत आयुक्त कार्यालय के माध्यम से उपलब्ध कराई गई ८ मोटर चालित नौकाओं को जिले के रणनीतिक स्थानों पर तैनात किया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त निजी नौकाओं की भी व्यवस्था की जाएगी।

सड़क बहाली और आपातकालीन राहत पर जोर

खराब मौसम के दौरान सड़कों पर पेड़ गिरने, मलबा जमा होने तथा आवागमन बाधित होने की आशंका को देखते हुए सड़क सफाई और आपातकालीन बहाली की तैयारियां मजबूत की गई हैं। पेड़ों और मलबे को हटाने के लिए आवश्यक मशीनरी, उपकरण तथा वाहनों को तैयार रखा जा रहा है। जलभराव, पानी के उल्टे प्रवाह और जल निकासी की समस्या से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है।
संभावित चक्रवाती खतरे को देखते हुए मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। आवश्यकता के अनुसार ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ) तथा अग्निशमन सेवा के कर्मियों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया जाएगा।

राहत सामग्री का पर्याप्त भंडार

बैठक में खाद्यान्न तथा अन्य आवश्यक राहत सामग्री की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। २३ अक्टूबर की भंडार रिपोर्ट के अनुसार, जिले के ५ गोदामों एवं भंडारण केंद्रों में लगभग १,१२,५३८ क्विंटल चावल उपलब्ध था।
इसके अतिरिक्त राहत सामग्री के भंडार में २५२ क्विंटल चूड़ा, १९७ क्विंटल गुड़ तथा आपातकालीन वितरण के लिए पॉलीथिन शीट के २,३८३ पैकेट उपलब्ध हैं।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों तक आवश्यक सामग्री की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। अधिकारियों को सुरक्षित पेयजल, पर्याप्त खाद्यान्न, बिजली की शीघ्र बहाली, पशुचारे, पशु चिकित्सा सहायता तथा मवेशियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं को अलर्ट रहने का निर्देश

स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों की समीक्षा के दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में वैकल्पिक बिजली व्यवस्था, आवश्यक दवाओं तथा एंटी-स्नेक वेनम (सर्पदंश रोधी दवा) की उपलब्धता का आकलन किया गया।
मौसम से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के जिला मुख्यालय अस्पताल और प्रखंडों से चिकित्सक तथा पैरामेडिकल कर्मियों को शामिल करते हुए मोबाइल चिकित्सा दल तैनात करने की योजना बनाई जा रही है। ये दल प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने में मदद करेंगे।

५३९ गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी

संभावित चक्रवाती परिस्थिति के दौरान गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को प्रशासन ने विशेष प्राथमिकता दी है। अगले १५ दिनों के भीतर प्रसव की संभावित तिथि वाली कुल ५३९ गर्भवती महिलाओं को विशेष निगरानी में रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग को इन महिलाओं के लिए समय पर चिकित्सकीय देखभाल, सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था तथा आवश्यक परिवहन एवं अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, ताकि खराब मौसम के दौरान भी उन्हें समय पर चिकित्सा सहायता मिल सके।

शहरी क्षेत्रों में जलभराव से निपटने की तैयारी

खुर्दा और जटनी नगरपालिका के साथ टांगी, बालूगांव तथा बाणपुर अधिसूचित क्षेत्र परिषदों में भी तैयारियों की समीक्षा की गई है। इन शहरी निकायों को जल निकासी पंप, वैकल्पिक बिजली व्यवस्था, पेयजल, आश्रयस्थल और वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि संभावित जलभराव तथा मौसम संबंधी अन्य आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
जिलाधिकारी ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि मौसम प्रणाली के अधिक सक्रिय होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कार्यशील स्थिति में रहें। संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव दलों की तैनाती के लिए तैयार रहने को भी कहा गया है।
जिला प्रशासन मौसम प्रणाली से संबंधित घटनाक्रम पर लगातार नजर रख रहा है। आम लोगों से आधिकारिक मौसम बुलेटिन और प्रशासनिक परामर्श का पालन करने तथा खराब मौसम के दौरान अनावश्यक जोखिम नहीं उठाने की अपील की गई है।
आश्रयस्थलों, आपातकालीन परिवहन, राहत सामग्री, स्वास्थ्य सेवाओं और बचाव दलों को तैयार रखकर खुर्दा जिला प्रशासन किसी भी संभावित प्रतिकूल परिस्थिति से तेजी और प्रभावी ढंग से निपटने की दिशा में प्रयासरत है।

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