अंत्योदय गृह योजना के तहत घर के लिए भटक रहा गरीब परिवार; मात्र १,२०० रुपये पेंशन और राशन चावल के सहारे गुजर-बसर, मां ने सरकार से लगाई गुहार
दिलीप कुमार पटनायक
खुर्दा, २४ अक्टूबर:- खुर्दा जिले के खुर्दा पंचायत समिति अंतर्गत कानपुर ग्राम पंचायत के डलाई साही निवासी ७० प्रतिशत दिव्यांग रवीन्द्र प्रधान के लिए आज भी पक्का मकान एक सपना बना हुआ है। सरकारी सहायता की उम्मीद में बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें अब तक पक्का मकान नहीं मिल पाया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहा उनका परिवार दिव्यांगता पेंशन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले राशन चावल के सहारे किसी तरह जीवन गुजार रहा है।

स्वर्गीय गोपीनाथ प्रधान के पुत्र रवीन्द्र प्रधान का कहना है कि उन्होंने अंत्योदय गृह योजना के तहत पक्का मकान प्राप्त करने के लिए खुर्दा पंचायत समिति कार्यालय तथा जिला प्रशासन के समक्ष कई बार अपनी समस्या रखी है। इसके बावजूद उनकी मांग पर अब तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। इससे परिवार की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं और आवास की समस्या के बीच उनका जीवन कठिनाइयों से घिरा हुआ है।
परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। रवीन्द्र को प्रतिमाह मात्र १,२०० रुपये दिव्यांगता पेंशन मिलती है। इसके अतिरिक्त राशन चावल ही उनके परिवार के लिए भोजन का एक प्रमुख सहारा है। आय का कोई पर्याप्त और नियमित स्रोत नहीं होने के कारण रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करना भी परिवार के लिए चुनौती बन गया है।
परिवार की इस कठिन परिस्थिति में रवीन्द्र की मां दूसरों के घरों में बर्तन मांजकर अपने बेटे और परिवार का भरण-पोषण करने को मजबूर हैं। घरेलू कामकाज से मिलने वाली मामूली आय से किसी तरह गुजारा तो हो जाता है, लेकिन परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल बना हुआ है। ऐसे में पक्का मकान बनवाना और भविष्य के लिए कुछ बचत करना उनके लिए दूर की बात है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए रवीन्द्र की मां ने मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार और खुर्दा जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने परिवार को अंत्योदय गृह योजना के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराने, प्रतिमाह ३५ किलो चावल देने तथा अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान करने की मांग की है, ताकि परिवार को मौजूदा संकट से राहत मिल सके।
इसके साथ ही परिवार ने दिव्यांगता पेंशन की राशि १,२०० रुपये से बढ़ाकर ३,५०० रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि वर्तमान पेंशन राशि से एक दिव्यांग व्यक्ति की आवश्यक जरूरतों को पूरा करना बेहद कठिन है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और सरकारी सहायता सुनिश्चित करना समय की मांग है।
रवीन्द्र प्रधान का मामला गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और पात्र परिवारों को आवास तथा सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में यह आवश्यक है कि रवीन्द्र के आवेदन की स्थिति की जांच की जाए और परिवार की वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों का समुचित आकलन किया जाए।
स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से रवीन्द्र प्रधान की पात्रता की जांच कर अंत्योदय गृह योजना के तहत उनके आवेदन पर विचार करने तथा नियमानुसार आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि दिव्यांगता और गरीबी से जूझ रहे इस परिवार की समस्या को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पात्र होने की स्थिति में उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ बिना अनावश्यक देरी के मिल सके।
रवीन्द्र और उनकी मां के लिए पक्का मकान केवल ईंट और सीमेंट से बनी एक इमारत नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद है। गरीबी और दिव्यांगता की दोहरी मार झेल रहा यह परिवार अब सरकार और जिला प्रशासन की ओर आशा भरी नजरों से देख रहा है। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी उनकी गुहार पर कब ध्यान देते हैं और परिवार को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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