शिक्षकों का उद्देश्य युवा मस्तिष्क को सही दिशा देना : दिलीप कुमार पटनायक

डीआईईटी खोरधा में नवप्रवेशित डीएलएड विद्यार्थियों के लिए सप्ताहव्यापी दीक्षारंभ कार्यक्रम शुरू

खोरधा, २ नवंबर : शिक्षकों की भूमिका विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, उनके भविष्य को संवारने तथा एक जिम्मेदार समाज के निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डीआईईटी), खोरधा में सोमवार को नवप्रवेशित प्रारंभिक शिक्षा में डिप्लोमा (डीएलएड) के प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए सप्ताहव्यापी ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान के शैक्षणिक वातावरण, पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण प्रक्रिया तथा शिक्षक शिक्षा से जुड़ी व्यावसायिक अपेक्षाओं से परिचित कराना है। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अनुशासन, समय की पाबंदी, नैतिक आचरण और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन डीआईईटी, खोरधा के प्राचार्य डॉ. तपस कुमार नायक ने किया। उन्होंने दीक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसकी अवधारणा को भारतीय शिक्षा परंपरा की गुरुकुल व्यवस्था से जोड़ा। उन्होंने कहा कि गुरुकुल परंपरा में ज्ञानार्जन के साथ-साथ चरित्र निर्माण, आत्मानुशासन और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व दिया जाता था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप कुमार पटनायक ने प्रशिक्षु शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षण केवल आजीविका अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के भविष्य को संवारने और समाज को सही दिशा देने का एक महान दायित्व है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र, मूल्यों और दृष्टिकोण के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका प्रभाव केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन पर लंबे समय तक बना रहता है। इसलिए भावी शिक्षकों को अपने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत से ही समयनिष्ठा, ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण जैसे गुणों को अपनाना चाहिए।

शिक्षक के व्यक्तिगत आचरण और कर्तव्यनिष्ठा के महत्व पर जोर देते हुए पटनायक ने कहा कि एक शिक्षक का व्यवहार और कार्य के प्रति उसकी प्रतिबद्धता विद्यार्थियों की कई पीढ़ियों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों से अपने प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने तथा शिक्षण पेशे से जुड़े सामाजिक दायित्वों को समझने का आह्वान किया।

इस अवसर पर डीआईईटी के प्राचार्य डॉ. नायक ने कहा कि विद्यार्थियों को डीएलएड पाठ्यक्रम को केवल एक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने का माध्यम नहीं समझना चाहिए, बल्कि इसे एक जिम्मेदार, संवेदनशील और समर्पित शिक्षक बनने की दिशा में पहला कदम मानना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ पढ़ाने और निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों में जिज्ञासा विकसित करना, उनके चरित्र का निर्माण करना तथा उनके बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक विकास में योगदान देना भी शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों से प्रशिक्षण अवधि के दौरान संस्थान में उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाने तथा अपने भीतर व्यावसायिक दक्षता, नैतिक मूल्यों और व्यक्तिगत अनुशासन का विकास करने का आह्वान किया।

सप्ताहव्यापी दीक्षारंभ कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान के शैक्षणिक वातावरण, पाठ्यक्रम, विषयवस्तु, प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं तथा संस्थान के नियमों और विनियमों की जानकारी दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों में संस्थान के प्रति अपनत्व की भावना विकसित करने और उन्हें आगामी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक चुनौतियों के लिए तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

कार्यक्रम में शिक्षक पेशे के नैतिक एवं सामाजिक पक्षों को विशेष महत्व दिया गया। इस दौरान बताया गया कि शिक्षक शिक्षा के प्रारंभिक चरण में विकसित होने वाली आदतें, दृष्टिकोण और मूल्य भावी शिक्षकों के व्यावसायिक जीवन को दिशा प्रदान करते हैं।

कार्यक्रम का समन्वय शिक्षक प्रशिक्षक सुश्री बिनापाणी पाढ़ी ने किया। इस अवसर पर सुश्री मोनालिसा पांडा, सुश्री रश्मि रेखा स्वाईं, सुश्री दीप्तिप्रभा दाश, सुश्री सुभलक्ष्मी परिड़ा, डॉ. आयशा तनवीर, सुश्री सुभस्मिता दाश तथा डॉ. मंजुलता हांसदा सहित संस्थान के अन्य संकाय सदस्य उपस्थित थे।

दीक्षारंभ कार्यक्रम का शुभारंभ नवप्रवेशित प्रशिक्षु शिक्षकों के जीवन में एक नई शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत का प्रतीक बना। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षक बनना केवल शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करना नहीं, बल्कि युवा मस्तिष्क को सही दिशा देने, बेहतर नागरिक तैयार करने और एक जिम्मेदार समाज के निर्माण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता का संकल्प है।

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