समग्र शिक्षा के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण : वक्ता

खोरधा में निष्ठा जोन स्तरीय सम्मेलन आयोजित; तीन जिलों के १२० प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा.

दिलीप कुमार पटनायक

खोरधा, ४ अक्टूबर: शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों, परीक्षाओं और शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि बच्चों के शरीर, मन, बुद्धि, हृदय और आध्यात्मिक चेतना के समन्वित विकास पर ध्यान दिया जाना चाहिए। शिक्षकों की भूमिका बच्चों के सर्वांगीण एवं समग्र विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विचार खोरधा स्थित श्रीअरविंद पूर्णांग शिक्षा केंद्र में आयोजित निष्ठा जोन स्तरीय अध्यक्ष एवं सचिव सम्मेलन में वक्ताओं ने व्यक्त किए।


सम्मेलन में खोरधा, पुरी और नयागढ़ जिलों के विभिन्न शिक्षण संस्थानों एवं संगठनों से जुड़े लगभग १२० अध्यक्षों एवं सचिवों ने भाग लिया। इस दौरान समग्र शिक्षा की अवधारणा तथा उसके सिद्धांतों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
प्रतिनिधियों ने कहा कि पारंपरिक शैक्षणिक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, मानवीय मूल्यों, नैतिकता, अनुशासन, रचनात्मकता, आत्मविश्वास तथा आध्यात्मिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, संवेदनशील और सुसंस्कृत नागरिक के रूप में विकसित करना होना चाहिए।
सम्मेलन की अध्यक्षता श्रीअरविंद पूर्णांग शिक्षा केंद्र के अध्यक्ष माधव चंद्र राउतरे ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मां एवं श्रीअरविंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। शाश्वती राउतरे ने मां का संगीत प्रस्तुत किया, जबकि रवींद्रनाथ पाढ़ी ने ‘सावित्री’ से काव्य-पाठ किया।
निष्ठा जोन के संयोजक सुकांत कुमार जेना ने अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का परिचय कराया। अध्यक्ष माधव चंद्र राउतरे ने स्वागत भाषण दिया तथा सम्मेलन के उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
आनंद चंद्र प्रधान ने संगठन के उद्देश्यों एवं कार्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षा को केवल बौद्धिक विकास का माध्यम नहीं माना जाना चाहिए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना तथा उन्हें जिम्मेदार और संवेदनशील मनुष्य के रूप में तैयार करना होना चाहिए।
शिक्षा समन्वयक कपिलेंद्र मिश्र ने समग्र शिक्षा के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों में अनुशासन, मानवीय मूल्य, रचनात्मकता, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में शिक्षकों की भूमिका, उनके आत्म-विकास तथा समग्र शिक्षा के उद्देश्य एवं लक्ष्यों पर समूह चर्चा आयोजित की गई। “अच्छा शिक्षक बनने के लिए स्वयं को महान योगी बनाना आवश्यक है” विषय चर्चा का प्रमुख केंद्र रहा।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक के व्यक्तित्व, आचरण और आदर्शों का विद्यार्थियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए शिक्षकों को अपने चरित्र, व्यवहार और व्यक्तित्व के निरंतर विकास की दिशा में प्रयासरत रहना चाहिए, ताकि वे विद्यार्थियों का सही मार्गदर्शन करने के साथ-साथ उन्हें प्रेरित और प्रोत्साहित कर सकें।
नवजीवन शिक्षा संसद के प्रदेश अध्यक्ष प्रसाद त्रिपाठी, जो सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे, ने समग्र शिक्षा के उद्देश्य एवं महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। उन्हें विद्यार्थियों को सही मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए निरंतर प्रेरित करना चाहिए।
सम्मेलन में विभिन्न शिक्षण संस्थानों एवं संगठनों के अध्यक्षों और सचिवों ने अपने अनुभव एवं विचार साझा किए। उन्होंने विद्यालयों में समग्र शिक्षा को अधिक प्रभावी एवं सार्थक बनाने के उपायों पर चर्चा की। इस दौरान इस बात पर भी जोर दिया गया कि विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक, नैतिक और भावनात्मक रूप से भी जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण में सहायक होगी। ऐसे नागरिक सामाजिक चुनौतियों का संवेदनशीलता, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध के साथ सामना कर सकेंगे। उन्होंने समग्र शिक्षा के आदर्शों को व्यावहारिक रूप देने के लिए शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों और विभिन्न संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में आनंद चंद्र प्रधान, कपिलेंद्र मिश्र और प्रसाद त्रिपाठी के अलावा कई अन्य प्रतिनिधियों ने भी विचार-विमर्श में हिस्सा लिया। नवजीवन शिक्षा संसद की सदस्य अपर्णा दास ने प्रथम सत्र के अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में मनोज कुमार महापात्र, ममता साहू और दीप्ति मयी साहू सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया। सुरेंद्र नाथ जेना ने समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापित किया।
तीन जिलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षकों एवं पदाधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने तथा समकालीन शैक्षणिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला। सम्मेलन का समापन शिक्षा को अधिक मानवीय, मूल्यपरक और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केंद्रित बनाने के संकल्प के साथ हुआ।

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