विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने फेसबुक पर कथित हिंदू-विरोधी पोस्ट के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत ;

संगठनों ने खोरधा साइबर पुलिस से ऑनलाइन सामग्री की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की

दिलीप कुमार पटनायक

खोरधा, २३ अक्टूबर:- फेसबुक पर हिंदू धर्म, हिंदू देवी-देवताओं और धार्मिक मान्यताओं के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट किए जाने के मामले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल की खोरधा जिला इकाइयों ने खोरधा साइबर पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा आरोप प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

बजरंग दल की खोरधा जिला इकाई के सह-संयोजक एस. एम. दिव्य प्रकाश ने साइबर पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुलमणि पात्रा के नाम से पहचाने गए एक फेसबुक अकाउंट पर आपत्तिजनक टिप्पणियां प्रकाशित की गई थीं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, कथित टिप्पणियों से हिंदू समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं तथा सामाजिक सद्भाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संगठनों ने पुलिस से आग्रह किया है कि संबंधित ऑनलाइन सामग्री की निष्पक्षता से जांच की जाए और यह पता लगाया जाए कि क्या उक्त सामग्री के प्रकाशन से कानून के किसी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है।

बताया गया है कि शिकायत के साथ कथित आपत्तिजनक पोस्ट के स्क्रीनशॉट, संबंधित फेसबुक अकाउंट के लिंक तथा सत्यापन के लिए उपलब्ध अन्य सामग्री भी संलग्न की गई है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से पोस्ट की प्रामाणिकता की जांच करने, उनके प्रकाशन की परिस्थितियों का पता लगाने तथा साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

संगठनों ने यह भी मांग की है कि आवश्यकता पड़ने पर जांच के दौरान स्थापित कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित सोशल मीडिया मंच से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाए, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने कहा है कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, संगठनों ने धार्मिक मान्यताओं, देवी-देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं से संबंधित सामग्री प्रकाशित करते समय सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया है।

इस शिकायत के बाद सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक सामग्री से निपटने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के शासन के बीच संतुलन बनाए रखने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया है। ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता के आरोपों को ही अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों, सामग्री के संदर्भ और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

अब पुलिस जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित पोस्ट वास्तविक हैं या नहीं, उन्हें किस संदर्भ में प्रकाशित किया गया था तथा क्या उनमें किसी लागू कानून का उल्लंघन हुआ है। फिलहाल, फेसबुक अकाउंट धारक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। सक्षम अधिकारियों की जांच पूरी होने तक किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

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