खोरधा में कोरेक्स की ५,५२० बोतलें जब्त, १० गिरफ्तार ;

बिहार का व्यक्ति मुख्य आपूर्तिकर्ता होने के संदेह में; अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

दिलीप कुमार पटनायक

खोरधा, १८ अक्टूबर:- खोरधा इंडस्ट्रियल एस्टेट पुलिस ने कोडीनयुक्त कफ सिरप की कथित अवैध आपूर्ति और वितरण से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए १० लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने रविवार तड़के नुआगांव के निकट खोरधा–नयागढ़ न्यू बाइपास रोड पर छापेमारी कर सिरप की ५,५२० बोतलें जब्त कीं।

जब्त सिरप की कुल मात्रा लगभग ५५२ लीटर आंकी गई है। यह कार्रवाई नशा मुक्त भारत अभियान के तहत मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के क्रम में १८ अक्टूबर को की गई।

पुलिस ने बिहार निवासी गोपीनाथ यादव उर्फ गोपी यादव (३०) को कथित गिरोह का सरगना और ओडिशा में कफ सिरप का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बताया है। जांचकर्ताओं को संदेह है कि वह कोलकाता, हरियाणा और दिल्ली से खेप मंगाकर परिवहनकर्ताओं, भंडारणकर्ताओं और स्थानीय वितरकों के नेटवर्क के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में इसकी आपूर्ति करता था।

गिरफ्तार अन्य आरोपियों की पहचान खोरधा सदर थाना क्षेत्र के कदलीबाड़ी निवासी दिव्य रंजन श्रीचंद (२५), खोरधा मॉडल थाना क्षेत्र के पल्ला निवासी सौम्य रंजन साहू (२५), जगतसिंहपुर थाना क्षेत्र के कुंभा अंडेइसाही निवासी ज्योति रंजन साहू (३५), भद्रक जिले के चांदबाली थाना क्षेत्र के सनासिंहपुर निवासी शंभुनाथ बारिक (३७), कटक के मालगोदाम थाना क्षेत्र के जोबरा निवासी बिष्णु प्रसाद सेनापति (३६), खोरधा इंडस्ट्रियल एस्टेट थाना क्षेत्र के निवासी रवींद्र सुंदराय (३८) और संतोष गजेंद्र (२३), कटक के मधुपटना थाना क्षेत्र के काजीडीहा निवासी दीपक बारिक (२६) तथा बेगुनिया थाना क्षेत्र के कदबा निवासी एसके सलाबत (२४) के रूप में हुई है।

विशेष टीम ने वाहनों को रोका

पुलिस के अनुसार, खोरधा इंडस्ट्रियल एस्टेट थाने के प्रभारी निरीक्षक को सूचना मिली थी कि कोडीनयुक्त कफ सिरप की एक बड़ी खेप कटक से खोरधा और नयागढ़ जिलों की ओर ले जाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर कार्रवाई की योजना बनाई गई।

खोरधा के पुलिस अधीक्षक परमार स्मित परशोत्तमदास के निर्देश पर उपनिरीक्षक स्वागतिका दास के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने सुबह करीब ४.५० बजे संदिग्ध वाहनों को रोककर आरोपियों को हिरासत में लिया।

पुलिस ने बताया कि जब्ती की कार्रवाई कार्यपालक दंडाधिकारी और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत की गई।

पुलिस के मुताबिक, आपूर्तिकर्ता के कथित प्रबंधक सहित दो अन्य आरोपी मौके से फरार हो गए। संदेह है कि उनका संबंध उस गोदाम-सह-आवासीय परिसर से है, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर कफ सिरप के भंडारण के लिए किया जाता था। फरार आरोपियों की तलाश में विशेष टीमें लगाई गई हैं।

वाहन, मोबाइल फोन और नकदी जब्त

कफ सिरप के अलावा पुलिस ने दो कारें—हुंडई आई-२० और हुंडई आई-१०—एक पियाजियो ट्रॉली ऑटो-रिक्शा, एक होंडा शाइन मोटरसाइकिल, एक टीवीएस ज्यूपिटर स्कूटर, ११ मोबाइल फोन और ३०,००० रुपये नकद जब्त किए हैं।

इस मामले में खोरधा इंडस्ट्रियल एस्टेट थाने में केस संख्या ३३७, दिनांक १८ अक्टूबर २०२६ को एनडीपीएस अधिनियम की धारा २१(सी) और २९ के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोप कथित तौर पर वाणिज्यिक मात्रा में प्रतिबंधित पदार्थ रखने और उसके वितरण से संबंधित हैं।

उपनिरीक्षक अशोक कुमार महंती मामले की जांच कर रहे हैं, जबकि उपनिरीक्षक स्वागतिका दास इस मामले की सूचनाकर्ता हैं।

जांच के दौरान फरार आरोपियों का पता लगाने, संदिग्ध भंडारण परिसर की पहचान कर तलाशी लेने, ओडिशा के बाहर के आपूर्तिकर्ताओं से संबंधों का पता लगाने, वित्तीय लेन-देन की जांच करने और कथित अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों की पहचान करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज

खोरधा स्थित जिला पुलिस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पुलिस अधीक्षक परमार स्मित परशोत्तमदास ने कहा कि यह कार्रवाई जिले में मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। इस अभियान के तहत ब्राउन शुगर, कोडीनयुक्त कफ सिरप और गांजा के अवैध कारोबार में कथित रूप से शामिल नेटवर्क को निशाना बनाया जा रहा है।

कोडीनयुक्त कफ सिरप का नशे के रूप में दुरुपयोग किए जाने, विशेषकर युवाओं में इसके बढ़ते चलन पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस ने आम लोगों से प्रतिबंधित मादक पदार्थों के अवैध भंडारण, परिवहन, बिक्री या सेवन की जानकारी साझा करने की अपील की।

पुलिस ने बताया कि ऐसी सूचना निकटतम थाने, आपातकालीन हेल्पलाइन ११२ या राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन मानस १९३३ के माध्यम से दी जा सकती है। पुलिस अधीक्षक ने आश्वासन दिया कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

पुलिस के अनुसार, कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क के पूरे दायरे का पता लगाने और इसमें शामिल सभी लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए आगे की जांच जारी है।

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